राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का योगाश्रम गुरुधाम में हुआ भव्य स्वागत


बांका : बांका के इतिहास में 3 अप्रैल 2017 का दिन हमेशा के लिए स्वर्णाक्षरों में दर्ज हो गया. देश के राष्ट्रपति महामहिम प्रणब मुखर्जी इस दिन इस धरती पर पधारे. पौराणिक मंदार की रमणिक उपत्यकाओं में अवस्थित योग आश्रम गुरुधाम में उनका पदार्पण हुआ. गुरुधाम में राष्ट्रपति महोदय का पांच सौ से ज्यादा गुरु भाइयों द्वारा भव्य स्वागत किया गया. यद्यपि वे यहां सिर्फ आधे घंटे रुके. इस दौरान उन्होंने पूजा-पाठ से लेकर कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया. बिहार सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने उनकी यहां अगवानी की. केंद्रीय मंत्री राजीव प्रसाद रूडी, गोड्डा (झारखंड) के सांसद निशिकांत दुबे तथा भागलपुर के पूर्व सांसद शाहनवाज हुसैन भी इस दौरान उनके साथ थे.

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बहुप्रतीक्षित गुरुधाम यात्रा 3 अप्रैल को 12:50 बजे से थी, लेकिन वे निर्धारित समय से 20 मिनट पूर्व ही यहां पहुंच गये. भारतीय वायु सेना के विशेष हेलीकॉप्टर से कहलगांव (भागलपुर) से चलकर वे यहां पहुंचे. गुरुधाम पहुंचने के साथ ही उन्होंने सर्वप्रथम गुरु आश्रम का रुख किया. वहां पहुंचकर राष्ट्रपति ने सबसे पहले गुरु महाराज की पूजा की. तत्पश्चात् वे शिव पंचायतन गए तथा भगवान शिव की पूजा आराधना की. पूजा आराधना के बाद वे गुरुधाम योग आश्रम के संस्थापक आचार्य भूपेंद्रनाथ सान्याल के आश्रम गए तथा उनके स्मृति चिन्हों को देखा.

इसके बाद राष्ट्रपति गुरु मंदिर के समक्ष बने विशेष मंच पर पहुंचे. वहां उन्हें शॉल, आचार्य भूपेंद्र नाथ सान्याल द्वारा लिखित योग गीता एवं उनकी तस्वीर भेंट की गयी. इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि योगीराज श्यामाचरण लाहिड़ी एवं आचार्य भूपेंद्र नाथ सान्याल के शिष्यों ने देश की आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उन्होंने इस आंदोलन में बढ़ चढ़कर भाग लिया. आजादी के संघर्ष के दौरान गुरुधाम राष्ट्र वीरों का केंद्र रहा. इस लिहाज से भी गुरुधाम का विशेष महत्व है. राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि उनके माता-पिता आचार्य भूपेंद्र नाथ सान्याल के शिष्य रहे हैं. उनके माता-पिता कई बार गुरुधाम आए. लेकिन वह कभी नहीं आ पाए थे. उनकी उत्कट इच्छा थी कि वे भी गुरुधाम के दर्शन करें. आज उनकी यह इच्छा पूरी हुई. यहां आकर उन्हें बहुत अच्छा लगा है.

इन संक्षिप्त कार्यक्रमों के बाद राष्ट्रपति वापस पटना होकर दिल्ली के लिए रवाना हो गए. यहां राष्ट्रपति के स्वागत के लिए व्यापक तैयारियां की गई थीं. जिला प्रशासन के साथ-साथ गुरूधाम आश्रम प्रबंधन की ओर से राष्ट्रपति की इस यात्रा के लिए खास तौर से तैयारियां की गई थी. देश के विभिन्न हिस्से से करीब 500 से ज्यादा शिष्य बंधु इस आयोजन में भाग लेने के लिए यहां पहुंचे थे. उन्होंने राष्ट्रपति को गुरुधाम से जुड़े तथ्यों और विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी. उन्हें यहां का इतिहास बताया गया. डीएम डॉ निलेश देवरे एवं आरक्षी अधीक्षक राजीव रंजन भी इस आयोजन की सफलता के लिए रात दिन लगे हुए थे. राष्ट्रपति के आगमन को लेकर गुरुधाम में सुरक्षा के व्यापक बंदोबस्त किए गए थे. आयोजन को लेकर की गई तैयारियां स्वयं बयां कर रही थीं कि यह सब कुछ एक राष्ट्राध्यक्ष के सम्मान में है.


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