स्वच्छ चरित्र से ही होता है स्वच्छ समाज का निर्माण : श्रेयसी
बांका : श्रीमद्भागवत महापुराण कोई सामान्य धार्मिक ग्रंथ नहीं है. इस ग्रंथ में सृष्टि का अक्स है. सृष्टि का स्वरुप है. यह इसलिए कि यह महाग्रंथ श्रीकृष्ण के चरित्र का वर्णन करता है, और श्री कृष्ण का चरित्र जो है, वही सृष्टि का स्वरूप है. यही वजह है कि सनातन भारतीय वांग्मय में श्रीमद्भागवत महापुराण को जीवों के उद्धारक का दर्जा प्राप्त है. जो इस महापुराण की कथानक का श्रवण करते हैं, वे मोक्ष को प्राप्त करते हैं. विष्णु स्वरुप श्रीकृष्ण की उन्हें असीम कृपा प्राप्त होती है. जिले के अमरपुर प्रखंड अंतर्गत पवई स्थित पवौरनी स्थान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के पहले दिन अपने प्रवचन का आगाज करते हुए वाराणसी के आचार्य श्रीरामभद्राचार्य जी ने ये बातें कहीं.
इससे पहले इस आयोजन का औपचारिक उद्घाटन सुप्रसिद्ध राष्ट्रीय महिला निशानेबाज श्रेयसी सिंह ने किया. ज्ञात हो कि श्रेयसी सिंह पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय दिग्विजय सिंह एवं बांका की पूर्व सांसद पुतुल सिंह की सुपुत्री हैं. वे खास तौर से इस आयोजन में हिस्सा लेने यहां पहुंचीं. गुरुवार को इस आयोजन को लेकर कलश शोभायात्रा में भी उन्होंने अपनी मां पूर्व सांसद पुतुल सिंह के साथ शिरकत की थी. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन सिर्फ एक धार्मिक आयोजन भर नहीं है. बल्कि यह मनुष्य के चरित्र निर्माण के रास्ते हमारे समाज का स्वच्छ निर्माण करता है. स्वच्छ समाज से स्वच्छ राष्ट्र का निर्माण होता है. इसलिए प्रकारांतर से ऐसे आयोजनों की आज के परिप्रेक्ष्य में खास प्रासंगिकता है.
इस अवसर पर आयोजन समिति के प्रवक्ता डॉ अभिषेक, सामाजिक कार्यकर्ता जीवन चौधरी, अध्यक्ष फुच्चीलाल पांडेय, सचिव दिलीप कुमार सिंह, कोषाध्यक्ष देवकीनंदन चौधरी आदि अनेक कार्यकर्ता उपस्थित थे. श्रीमद्भागवत कथा के पहले ही दिन कथा श्रवण के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी. आसपास के कई गांवों के श्रद्धालु इस आयोजन में भाग लेने पहुंचे. आयोजन स्थल पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अनेक इंतजाम किए गए हैं. इस आयोजन को लेकर पवई एवं आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धा, भक्ति और अध्यात्म का माहौल कायम हो गया है.
--मनोज उपाध्याय


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